July 27, 2021

जनोदय टाइम्स

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गाजियाबाद : श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ 2 द्वितीय दिवस माया नहीं मायापति की शरणागति करें-धीरशान्त

श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ

श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ

गाजियाबाद: श्रीराम मन्दिर, राम वाटिका में आयोजित “श्रीमद्भागवत-कथा-सप्ताह” के द्वितीय दिवस इस्कॉन के आचार्य धीर शान्त दास ने बताया कि मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र उसकी शिक्षा और ज्ञान होता है जो सदैव उसका साथ देता है और पग पग पर सहायता करता है। निरक्षर के लिए पुस्तक और दृष्टिहीन के लिए दर्पण की कोई उपयोगिता नही होती उसी प्रकार भगवत सेवा के बिना मनुष्य योनि का कोई लाभ नही होता।
राजा परीक्षित के शासन में कलियुग धर्म रूपी बैल के साथ प्रकट हुआ किन्तु धर्म के चार चरणों क्रमशः सत्य, पवित्रता, तप और दया में तीन घायल हो गए मात्र “सत्य” रूपी चरण पर कलियुग आधारित है जिसके फलस्वरूप हरिनाम ही कलियुग का तारणहार है।
नृसिंह-लीला का वर्णन करते हुए बताया कि आसुरी मानसिकता के लोग धन, बल, शक्तियों और साधनों का दुरूपयोग करके संसार पर राज्य की लालषा रखते हैं वह संसार में अत्याचार और धर्मविमुख कार्यो के द्वारा असन्तुलन पैदा करते है तब तब भगवान असंख्य अवतारों को धारण करके भक्तो का उद्धार करते हैं। हिरण्यकशिपु के अत्याचारों से त्रस्त भक्त प्रह्लाद की रक्षा की और उसज वध किया।
शास्त्रों के रहस्यों का वर्णन करते हुये बताया कि सज्जनता जीवन को शीतलता प्रदान करने वाली समीर है। सज्जनता के अभाव में जीवन उस जलते अंगारे के सामान है जो स्वयं तो जलता ही है मगर अपने संपर्क में आने वाले को भी जलाता है।
सज्जनता ही जीवन का आभूषण और श्रृंगार है। सोने की लंका में रहने वाला रत्न जडित सिंहासन पर आरुढ़, नानालंकारों को धारण करने वाले रावण का जीवन भी शोभाहीन है। और पर्वत पर पत्थर के ऊपर व पेड़ की डालों पर बैठे सुग्रीव, हनुमान जी सहित आदि वानरों व अँधेरी गुफा में वास करने वाले जामवंत का जीवन शोभायुक्त है।
जीवन की शोभा अलंकारों में नहीं अपितु आपके उच्च विचारों से है। सज्जनता रुपी आभूषण को धारण करो ताकि स्वर्ण आभूषणों के अभाव में भी आपका सौन्दर्य बना रहे।
सतयुग मे तपस्या, त्रेतायुग मे यज्ञ, द्वापर मे अर्चा-विग्रह पूजा और कलियुग मे तो मात्र हरिनाम से ही मुक्ति मिल जाती है।
भक्ति से मानुष जीवन सफल होता है और 84 लाख योनियों से छुटकारा मिलता है।
व्यवस्था में प्रिंस शर्मा, अजय शर्मा, सुनील शर्मा, पूजा एवं सुनीता शर्मा, प्रधान ऋषि पाल सिंह, समरपाल सिंह यादव, रविन्द्र दारोगा, कपिल त्यागी, जसबीर नागर, सतीश यादव, महन्त अशोक शर्मा ने सहयोग किया।

टीम जनोदय टाइम्स

श्रीराम मन्दिर, राम वाटिका में आयोजित “श्रीमद्भागवत-कथा-सप्ताह” के द्वितीय दिवस इस्कॉन के आचार्य धीर शान्त दास ने बताया कि मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र उसकी शिक्षा और ज्ञान होता है जो सदैव उसका साथ देता है और पग पग पर सहायता करता है। निरक्षर के लिए पुस्तक और दृष्टिहीन के लिए दर्पण की कोई उपयोगिता नही होती उसी प्रकार भगवत सेवा के बिना मनुष्य योनि का कोई लाभ नही होता।
राजा परीक्षित के शासन में कलियुग धर्म रूपी बैल के साथ प्रकट हुआ किन्तु धर्म के चार चरणों क्रमशः सत्य, पवित्रता, तप और दया में तीन घायल हो गए मात्र “सत्य” रूपी चरण पर कलियुग आधारित है जिसके फलस्वरूप हरिनाम ही कलियुग का तारणहार है।
नृसिंह-लीला का वर्णन करते हुए बताया कि आसुरी मानसिकता के लोग धन, बल, शक्तियों और साधनों का दुरूपयोग करके संसार पर राज्य की लालषा रखते हैं वह संसार में अत्याचार और धर्मविमुख कार्यो के द्वारा असन्तुलन पैदा करते है तब तब भगवान असंख्य अवतारों को धारण करके भक्तो का उद्धार करते हैं। हिरण्यकशिपु के अत्याचारों से त्रस्त भक्त प्रह्लाद की रक्षा की और उसज वध किया।
शास्त्रों के रहस्यों का वर्णन करते हुये बताया कि सज्जनता जीवन को शीतलता प्रदान करने वाली समीर है। सज्जनता के अभाव में जीवन उस जलते अंगारे के सामान है जो स्वयं तो जलता ही है मगर अपने संपर्क में आने वाले को भी जलाता है।
सज्जनता ही जीवन का आभूषण और श्रृंगार है। सोने की लंका में रहने वाला रत्न जडित सिंहासन पर आरुढ़, नानालंकारों को धारण करने वाले रावण का जीवन भी शोभाहीन है। और पर्वत पर पत्थर के ऊपर व पेड़ की डालों पर बैठे सुग्रीव, हनुमान जी सहित आदि वानरों व अँधेरी गुफा में वास करने वाले जामवंत का जीवन शोभायुक्त है।
जीवन की शोभा अलंकारों में नहीं अपितु आपके उच्च विचारों से है। सज्जनता रुपी आभूषण को धारण करो ताकि स्वर्ण आभूषणों के अभाव में भी आपका सौन्दर्य बना रहे।
सतयुग मे तपस्या, त्रेतायुग मे यज्ञ, द्वापर मे अर्चा-विग्रह पूजा और कलियुग मे तो मात्र हरिनाम से ही मुक्ति मिल जाती है।
भक्ति से मानुष जीवन सफल होता है और 84 लाख योनियों से छुटकारा मिलता है।
व्यवस्था में प्रिंस शर्मा, अजय शर्मा, सुनील शर्मा, पूजा एवं सुनीता शर्मा, प्रधान ऋषि पाल सिंह, समरपाल सिंह यादव, रविन्द्र दारोगा, कपिल त्यागी, जसबीर नागर, सतीश यादव, महन्त अशोक शर्मा ने सहयोग किया।

 

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